वर्धन वंश PDF नोट्स Free Download

आज के इस पोस्ट के माध्यम से हम आपके साथ वर्धन वंश PDF नोट्स शेयर करेंगे, जिसे आप इस पोस्ट में नीचे दिए गए डायरेक्ट डाउनलोड लिंक की सहायता से निशुल्क डाउनलोड करके पढ़ सकते है|

गुप्त वंश के पतन के बाद ही वर्धन वंश का स्थापना हुआ, इस वंश के स्थापना का श्रेय पुष्यभूति को जाता है, जिसके कारण वर्धन वंश को अन्य नाम पुष्यभूति वंश के नाम से भी जाना जाता है| वर्धन वंश की राजधानी थानेश्वर थी, और इस वंश का सबसे प्रतापी और प्रसिद्ध शासक हर्षवर्धन था|

वर्धन वंश PDF

इस वंश के सबसे महान राजा हर्षवर्धन को शिलादित्य की उपाधि प्राप्त है इसीलिए इसे शिलादित्य के नाम से जाना जाता है| यह उत्तर भारत का सबसे प्रतापी हिन्दू शासक था| जिसका वर्चस्व उत्तर भारत में था| साथ ही हर्षवर्धन ने थानेश्वर को कनौज के साथ मिला दिया और कनौज को वर्धन वंश की राजधानी घोषित कर दिया|

साथ ही राजा हर्षवर्धन का ताल्लुक बौध धर्म के महायान शाखा से था| हर्षवर्धन बौध धर्म का अनुयायी था इसी वजह से यह अपने राज्य में बौध महासम्मेलन का आयोजन निरंतर किया करते थे|

अगर आप भी वर्धन वंश के सम्पूर्ण इतिहास को पढना चाहते है तो इस पोस्ट में शेयर किये गए पीडीऍफ़ नोट्स को अवश्य पढ़े, क्योंकि इस पीडीऍफ़ नोट्स में वर्धन वंश के सभी शासकों के बारे में क्रमबद्ध तरीके से विस्तार से दिया गया है|

Vardhan Vansh Notes PDF: Overview

PDF Nameवर्धन वंश PDF
LanguageHindi
No. of Pages7
PDF Size1.3 MB
CategoryHistory
QualityGood

Download वर्धन वंश PDF

निचे दिए गए डाउनलोड बटन का अनुसरण करके आप वर्धन वंश के सम्पूर्ण जानकारी को पीडीऍफ़ नोट्स के रूप में निशुल्क डाउनलोड करके पढ़ सकते है|

आज के इस पोस्ट के माध्यम से हमने आपके साथ Vardhan Vansh Notes PDF शेयर किया, उम्मीद है कि इस पीडीऍफ़ नोट्स में दी गयी जानकारी आपको अवश्य पसंद आएगी| अगर आप प्रतियोगी परीक्षा के लिए तैयारी कर रहे है तो विजयनगर साम्राज्य PDF नोट्स आपके लिए महत्वपूर्ण हो सकता है|

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