बिहार की प्रमुख झीलें – Major Lacks of Bihar

आज के इस पोस्ट में हमलोग बिहार की प्रमुख झीलें (Major Lacks of Bihar) के बारे में विस्तार से चर्चा करेंगे, बिहार के झीलों के बारे में बिहार स्तर के प्रतियोगी परीक्षा में अक्सर पूछे जाते है इसीलिए अगर आप भी प्रतियोगी परीक्षा के लिए तैयारी कर रहे है तो आज का यह पोस्ट आपके लिए बहुत ही महत्वपूर्ण हो सकता है, इसीलिए इस पोस्ट को पूरा अवश्य पढ़े|

गंगा नदी के मैदानी भाग में स्थित बिहार में कई प्राकृतिक झीलें मौजूद है जिसमे से कुछ झीलें विख्यात है, जिसके बारे में परीक्षा में भी पूछे जाते है| अगर आप PCS या कोई भी प्रतियोगी परीक्षा के लिए तैयारी कर रहे है तो आपको यह पोस्ट पूरा अवश्य पढना चाहिए क्युकि इस पोस्ट में बिहार की सभी प्रमुख झीलों के बारे में विस्तृत जानकारी दी गयी है|

बिहार की प्रमुख झीलें (Major Lacks of Bihar)

आइये जानते है, बिहार के स्थित सभी प्रमुख झीलों के बारे में विस्तार से-

1. काँवर झील

  • स्थित- मंझोल गांव (बेगुसराय)
  • क्षेत्रफल – 16 वर्ग किलोमीटर
  • प्रकार – गोखुर झील

काँवर झील बिहार के बेगुसराय जिले के मंझोल गांव में स्थित है| इस झील का कुल क्षेत्रफल 16 वर्ग किलोमीटर है| काँवर झील का निर्माण गंडक नदी के विसर्पण से हुआ है| 60 से भी अधिक प्रजातीय पक्षी इस झील में ठंडी के दिनों में मध्य एशिया से निवास करने के लिए आती है| साथ-ही नवम्बर-दिसम्बर के दोनों में साइबेरियन पक्षी में यहाँ दिखाई पढ़ती है| कुल मिला कर कहा जाये तो पक्षिओं के निवास के लिए यह झील काफी प्रसिद्ध है| भारतीय तथा विदेशी कुल मिलकर यहाँ लगभग 106 प्रजाति की पक्षी निवास करती है|

साथ-ही बेगुसराय के मंझोल गांव में स्थित इस झील में हाइड्रा लेरिसिलाय, पोटोमोगेंटन, वेल्सनेरिया, लेप्लराल्स, निफसा, मिंफोलोड्स, सरपस वेटल्वेरिया आदि वनस्पतियाँ भी पाई जाती है|

2. कुशेश्वर स्थान झील

कुशेश्वर स्थान झील
  • स्थित- कुशेश्वर (दरभंगा)
  • क्षेत्रफल – 20 वर्ग किलोमीटर से 100 वर्ग किलोमीटर

बिहार राज्य के दरभंगा जिले के कुशेश्वर में स्थित इस झील को कुशेश्वर स्थान झील के नाम से भी जाता जाता है| यह झील भी पक्षियों के निवास के लिए बहुत ही प्रसिद्ध है| इस झील में अत्यधिक मात्रा में पक्षियाँ निवास करती है इसीलिए वर्ष 1972 इस्वी में इस झील को पक्षी अभ्यारण्य घोषित कर दिया गया|

वैसे तो इस झील का विस्तार 20 वर्ग किलोमीटर है परन्तु वर्षा ऋतू में जब बारिश होती है तो इस झील का विस्तार अत्यधिक पानी के कारण बढ़ जाता है और 100 वर्ग किलोमीटर तक हो जाता है|

इस झील में मुख्य रूप में कमला और करेह नदी का पानी एकत्रित होता है और इस झील में भारत के पक्षिओं के साथ-साथ प्रवासी पक्षियाँ भी निवास करती है| यहाँ ठंडी के दिनों में मुख्य रूप से पेलिकन डालमटिया तथा साइबेरियन क्रेन पक्षियाँ दिखाई देती है|

3. घोघा झील

  • स्थान- मनीहारी (कटिहार)
  • क्षेत्रफल- 5 वर्ग किलोमीटर

बिहार राज्य के कटिहार जिले में गंगा नदी के किनारे स्थित मनिहारी के निटक ही घोघा झील है| इस झील का विस्तार वैसे तो सिर्फ 5 वर्ग किलोमीटर ही है परन्तु जब भी बिहार बाढ़ जैसे समस्याओं से जूझता है तो इस झील का विस्तार काफी ज्यादा बढ़ जाता है|

इस झील में मुख्य रूप से भारत की ही पक्षियाँ देखने को मिलती है| प्रवासी पक्षिओं का प्रचलन इस झील में बहुत ही कम देखने को मिलता है| साथ-ही यह झील बिहार के लोगों के बिच ज्यादा लोकप्रिय भी नहीं है|

साथ-ही घोघा झील के आसपास कई छोटी-छोटी झीले भी है तो बाढ़ आने के कारण मिलकर एक हो जाती है और इस झील का क्षेत्रफल काफी बढ़ जाता है|

4. सिमरी-बख्तियारपुर झील

  • स्थान- सिमरी-बख्तियारपुर (सहरसा)
  • क्षेत्रफल- ज्ञान नहीं

दरअसल बिहार राज्य के सहरसा जिले में सिमरी-बख्तियारपुर के क्षेत्र में स्थित इस झील का निर्माण कई छोटे-छोटे झीलों के मिलने से हुआ है| और इस झील का विस्तार भी बाकि झीलों की तुलना बहुत ही कम है| इसमें मिलने वाले कुछ झीलों के नाम कुछ इस प्रकार है मुनिया, सरदिया, कुमीबी, गोबरा आदि

आज के इस पोस्ट के माध्यम से हमने बिहार की प्रमुख झीलें (Major Lacks of Bihar) के बारे में विस्तार से चर्चा किया| उम्मीद है कि इस पोस्ट के माध्यम से शेयर की गयी जानकारी आपको अवश्य पसंद आई होगी| अगर आप प्रतियोगी परीक्षा के लिए तैयारी कर रहे है तो बिहार की प्रमुख नदियों की जानकारी भी आपके लिए महत्वपूर्ण हो सकता है|

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