जजमानी व्यवस्था क्या है? | परिभाषा, अर्थ, विशेषता

आज के इस पोस्ट के माध्यम से हमलोग चर्चा करेंगे कि जजमानी व्यवस्था क्या है? जजमानी व्यवस्था की परिभाषा, अर्थ, विशेषता के बारे में भी विस्तार से चर्चा करेंगे|

जजमानी व्यवस्था का महत्व आज भी ग्रामीण समाज में बहुत ज्यादा है| यह व्यवस्था कितनी महत्वपूर्ण है यह समझने के लिए हमलोग को सर्वप्रथम इस बात में बात पे ध्यान देना होगा कि यह प्रथा भारत के किन-किन भागों में पायी जाती है और इसका स्वरुप कैसा है|

यह व्यवस्था भारत देश के लगभग सभी ग्रामीण समुदाय में पाया जाता है| शहरों में इस प्रथा का प्रचालन लगभग नहीं के बराबर देखा जाता है| आइये इसके बारे में विस्तार से जानते है|

जजमानी व्यवस्था क्या है?

यह व्यवस्था ग्रामीण समुदाय का एक बहुत ही महत्वपूर्ण और पीढ़ी दर पीढ़ी चलने वाली प्रथा है| जो आज भी भारत के सभी वर्ग के ग्रामीण समुदाय में वैसे ही प्रचलित है जैसा आज के कई वर्ष पहले हुआ करती थी|

इस व्यवस्था की व्यपक्स्था के विषय में श्री ऑस्कर लुइ का नाम शीर्ष पर लिया जाता है| क्योंकि इन्होने इसकी व्यापकता पर उत्तर प्रदेश, मैसूर, हैदाबाद, गुजरात, पंजाब आदि में अध्ययन करके इसके महत्व को दर्शाया है| लुइ के अनध्ययन के बाद बहुत सारी छोटी स्तरों पर अध्ययन किया गया, और यह सिद्ध हुआ हुआ जजमानी एक बहुत ही महत्वपूर्ण ग्रामीण सामाजिक संस्था है, जिसका जाति, व्यवसाय, तथा अर्थ- व्यवस्था तीनों पक्षों में मुख्य सम्बन्ध है|

इस व्यवस्था के व्यापक प्रचं और परंपरात्मकता को समझने के बाद यह अवश्य कहा जा सकता है कि इसमें कुछ महत्वपूर्ण गुण और कुछ उपयोगी भूमिकाएं अवश्य ही निहित होंगी|

जजमानी व्यवस्था के प्रमुख कार्यों अथवा इसकी उपयोगिता के महत्व को कुछ इस प्रकार समझाया जा सकता है|

1. वंशानुगत व्यवसायों का संरक्षण

जजमानी प्रणाली में अलग-अलग जातियों के लोग अपने-अपने निर्धारित जातिगत व्यवसायों को संरक्षण प्रदान करती है| सभी शुद्र जाति के लोग विशेषतया अपने कार्यों के द्वारा दूसरों की सेवा करती है और उनकी आवश्यकता पूरी करके अप्रत्यक्ष रूप से अपनी आवश्यकताओं को भी पूरा करने की क्षमता प्राप्त करती है| इस प्रकार परंपरागत पेशों का विनाश या लोप नहीं होता है बल्कि उनका ग्रामीण समुदाय में एक सामान्य अथवा विशेष स्थान भी बना रहता है|

2. सामाजिक नियंत्रण

जजमानी व्यवस्था से ग्रामीण समुदाय को कई प्रकार से सामाजिक नियंत्रण के साधनों के रूप में लाभ हुआ है| श्री रोस के द्वारा बाताए गए इन स्वरूपों के संदर्व में हम जजमानी व्यवस्था की भूमिका इस प्रकार निर्धारित कर सकते है|

3. घनिष्ठ सामाजिक सम्बन्ध

यह प्रथा के अंतर्गत संबंधों में घनिष्ठता आती है क्योंकि परिजन और जनमान दोनों पक्षों का सम्बन्ध पीढ़ी- दर-पीढ़ी चलता आता है| दोनों पक्ष एक दुसरे के स्वभावों तथा आदतों को भली भांति समझते है, और एक दुसरे के प्रति अनुकूल या अभियोजन करने के लिए प्रेरित होते है|

आज के इस पोस्ट के माध्यम से हमने चर्चा किया कि जजमानी व्यवस्था क्या होती है? और इसके कुछ विशेषताओं के बारे में भी चर्चा किया| उम्मीद है कि इस पोस्ट में दी गयी जानकारी आपको अवश्य पसंद आई होगी| अगर पोस्ट पसंद आया तो अपने दोस्तों के साथ अवश्य शेयर करे|

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