बिहार की प्रमुख नहरें तथा सिंचाई परियोजना

आज के इस पोस्ट में हमलोग बिहार की प्रमुख नहरें तथा सिचाई परियोजना के बारे में विस्तार से चर्चा करेंगे, बिहार के नहरों के बारे में अक्सर बिहार स्तर के प्रतियोगी परीक्षा में सवाल पूछे जाते है इसीलिए इस पोस्ट का अध्ययन अच्छे से अवश्य करे|

बिहार में सिंचाई की प्रमुख स्रोत नहर,तालाब,नलकूप, कुआँ,आहर तथा पाइन इत्यादि है| बिहार क जलस्तर भारत के कुल जलस्तर का लगभग 5% है| यहाँ कई साधनों के द्वारा खेतों की सिचाई की जाती है, जिसमे सिचाई के लिए नहरों का इस्तेमाल सबसे प्रमुख है| बिहार में नहरों द्वारा सिचाई अधिकतर बिहार के उत्तरी क्षेत्र में होता है| आइये जानते है बिहार की नहरों के बारे में विस्तार से|

बिहार की प्रमुख नहरें

बिहार की उत्तरी भाग की मिट्टी काफी मुलायम होती है और यहाँ की जमीन ढाल मंद होती है| अतः इस क्षेत्र में नहर को सिंचाई के लिए उत्तम माना जाता है| नहर के द्वारा सिंचाई के आग्रानी जिले मुख्य रूप से रोहतास,पश्चिम चम्पारण,औरंगाबाद तथा कैमूर इत्यादि है|

बिहार में प्रमुख दो प्रकार की नहर पाया जाता है|

  1. नित्यावाही नहर:- ये वह नहर है,जो वर्षा के जल से परिपूर्ण रहती है| इन नहरों का उदगम बहती नदियों से तथा बांधो से निर्मित जलाशय से होता है| उत्तर बिहार की अधिकतर नहर तहर की है|
  2. अनित्यावाही नहर:- ये एक प्रकार का मौसमी नहर है| जो बहती नदियों से निकाली गई है| वर्षा के मौसम में नदियों में बाढ़ के अलाबे ये जल से बहती है|

बिहार की प्रमुख नहर तथा इन नहरों द्वारा सिंचाई का विवरण

  1. सोन नहर:- यह नहर पुरानी हो जाने के कारण उपयोगी नही रहा, इसलिए सोनवराज योजना के द्वारा नई बांध का निर्माण किया गया| जिससे इन नहर से दो नई नहर निकाली गई| जिसे पूर्वी सोन नहर तथा प० सोन नहर के नाम से जानते हैं| यह नहर मुख्य रूप से डिहरी के निकट बांध बनाकर निकाला गया है| जो पश्चिम में शाहाबाद तथा पूर्व में गया और पटना जिलों को सिंचाई के लिए जल उपलब्ध करता है|

2. त्रिवेणी नहर:- इस नहर का निर्माण 1904 में किया गया है| यह पश्चिम चम्पारण के त्रिवेणी नामक स्थान में गंडक नदी से निकाला गया है| इस नहर के द्वारा पश्चिम चम्पारण जिले के लगभग 1.25 लाख हेक्टेयर भूमि को सिंचाई के लिए जल उपलब्ध करता है|

3. ढाका तथा तिउर की नहर:- यह नहर चम्पारण जिलें के अंतर्गत आते हैं| जो लालबकिया एवं तिउर नदियों से निकाली गई नहर है| इस नहर के द्वारा प्रत्येक वर्ष लगभग 25 हजार हेक्टेयर भूमि की सिंचाई किया जाता है|

4. कमला नहर:- इस नहर के माध्यम से मुख्य रूप से मधुबनी के क्षेत्रों में सिंचाई किया जाता है| यह दरभंगा जिले के उत्तरी भाग के कमला नामक नदी से निकाली गई एक नहर परियोजना है|

5. कोसी परियोजना की नहरे:- भारत तथा नेपाल के निकट हनुमान नगर के समिप बांध बनाकर दोनों ओर दो नहरे निकाली गई है| जिसे हम पूर्वी कोसी नहर तथा पश्चमी कोसी नहर के नाम से जानते हैं|

(क) पूर्वी कोसी नहर:– यह हनुमान नगर जलाशय के पूर्व से निकाली गई एक नहर है| जिसकी कुल लम्बाई 44 किलोमीटर है| इसकी चार शाखायें (अ) मुरलीगंज नहर 64 किलोमीटर (ब) जानकी नगर नहर 82 किलोमीटर (स) पूर्णिया नहर 64 किलोमीटर तथा (द) अररिया नहर 58 किलोमीटर लम्बी इत्यादि हैं|

(ख) पश्चमी कोसी नहर:- यह हनुमान नगर जलाशय के पश्चमी भाग से निकाली गई एक नहर है|इस नहर की लम्बाई लगभग 115 किलोमीटर है| इस नहर के माध्यम से मुख्य पुर से दरभंगा जिले की लगभग 3 लाख हेक्टेयर भूमि की सिंचाई की जाती है|

6. गंडक परियोजना की नहर:- गंडक नदी के त्रिवेणी नामक स्थल से 760 मीटर दक्षिण में वाल्मिकी नगर में एक बांध परियोजना के द्वारा निकला गया है| इस बांध के पश्चमी छोर पर सारण नहर है तथा पूर्वी छोर पर तिरहुत नहर है| इस नहर से मुख्य रूप से सारण जिले के 4.8 लाख हेक्टेयर भूमि की जाती है| जबकि सारण नहर योजना से मुख्य रूप से चम्पारण, मुजफ्फरपुर तथा दरभंगा जिलें की लगभग 6.90 लाख हेक्टेयर भूमि की सिंचाई की जाती है|

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बिहार में सिचाई के अन्य साधन

नलकूप द्वारा सिंचाई:-भूमिगत जल के उच्चस्तर वाले क्षेत्रों में ही नलकूप लगाया जाता है| जिससे सिंचाई करने में आसानी होती है| बिहार के मैदानी क्षेत्रों में अत्यधिक मात्रा में नलकूपों द्वारा सिंचाई किया जाता है| बिहार में निजी एवं सरकारी नलकूपों द्वारा कुल 64.25 हजार हेक्टेयर भूमि की सिंचाई की जाती है| इस विधि से सबसे अधिक सिंचाई बिहार के समस्तीपुर, सीतामढ़ी तथा बेगुसराय जिलों में किया जाता है|

कुआँ द्वारा सिंचाई:– बिहार का यह एक पुराना सिंचाई प्रणाली है| गंगा के मैंदानी भाग के भूमिगत जल का स्तर ऊची है| इन क्षेत्र में केवल 7 फिट की गहराई मिट्टी खोदने पर ही पानी का स्रोत मिल जाता है| बिहार में सबसे अधिक कुआँ से सिंचाई करने वाले जिले सारण,गोपालगंज तथा सिवान है|

तालाब द्वारा सिंचाई:- बिहार के पहाड़ी तथा पठारी भागों में सबसे अधिक तालाबो द्वारा सिंचाई किया जाता है| बिहार में पूर्णिया को छोरकर लगभग सम्पूर्ण राज्य में तालाब के द्वारा सिंचाई किया जाता है| क्योंकि पूर्णिया में वार्षिक वर्षा दर अधिक है| तालाब के द्वारा कुल सिंचाई क्षेत्र का 2.7 % भागो में सिंचाई किया जाता है|

आहर एवं पाइन द्वारा सिंचाई:- इसका निर्माण नदियों,नालों या नहरों से मिट्टी खोदकर किया जाता है| गया, पटना, भागलपुर तथा मुंगेर आदि जिलों में पाइन के द्वारा सिंचाई किया जाता है और वर्तमान समय में आहर विधि के द्वारा सिंचाई पटना, मुंगेर, शाहाबाद तथा दरभंगा आदि जिलों में प्रचलित है|

अंतिम शब्द

आज के इस पोस्ट के माध्यम से हमने बिहार की प्रमुख नहरें तथा सिंचाई परियोजना पर विस्तार से चर्चा किया, उम्मीद है कि इस पोस्ट में दी गयी जानकारी से आपको अवश्य कुछ सिखने को मिला हो| अगर आप बिहार स्तर के प्रतियोगी परीक्षा या कोई भी प्रतियोगी परीक्षा के लिए तैयारी कर रहे है तो बिहार की प्रमुख नदियों के बारे में भी जानना आपके लिए महत्वपूर्ण हो सकता है|

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Kajal Sharma

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